Thursday, July 31, 2014

मुंशी प्रेमचंद जयंती पर एक ऑडि‍यो कार्यक्रम



.....हि‍न्‍दी साहि‍त्‍य की यथार्थवादी परंपरा के नींवधारक मुंशी प्रेमचंद....

प्रेमचंद (३१ जुलाई१८८० - ८ अक्तूबर १९३६हिन्दी और उर्दू के महानतम भारतीय लेखकों में से एक हैं।मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव वाले प्रेमचंद को नवाब राय और मुंशी प्रेमचंद के नाम से भी जाना जाता है। उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विख्यात उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने उन्हें उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था। प्रेमचंद ने हिन्दी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिसने पूरी शती के साहित्य का मार्गदर्शन किया। आगामी एक पूरी पीढ़ी को गहराई तक प्रभावित कर प्रेमचंद ने साहित्य की यथार्थवादी परंपरा की नींव रखी। उनका लेखन हिन्दी साहित्य की एक ऐसी विरासत है जिसके बिना हिन्दी के विकास का अध्ययन अधूरा होगा। वे एक संवेदनशील लेखक, सचेत नागरिक, कुशल वक्ता तथा सुधी संपादक थे। बीसवीं शती के पूर्वार्द्ध में, जब हिन्दी में की तकनीकी सुविधाओं का अभाव था, उनका योगदान अतुलनीय है। 



प्रेमचंद पर आधारि‍त एक ऑडि‍यो कार्यक्रम


प्रस्‍तुति - सुप्रि‍या
वाचक - हरि‍श्‍चंद्र
नाट्य स्‍वर - संज्ञा, वि‍वेक, अजय
बाल कलाकार - अभ्‍युदय




Saturday, August 31, 2013

गीतों की बहार 3 - वादा

गीतों की बहार 3

सीजी रेडि‍यो के श्रोताओं से वादे की बातें.......गीतों के साथ.....
और साथ में हैं हमारी एंकर पद्मामणि
                     
                     



Sunday, August 18, 2013

गुलज़ार......आज के दौर के गीतकार......

ग़ुलज़ार नाम से प्रसिद्ध सम्पूर्ण सिंह कालरा (जन्म-१८ अगस्त, १९३६) हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध गीतकार हैं। इसके अतिरिक्त वे एक कवि, पटकथा लेखक, फ़िल्म निर्देशक तथा नाटककार हैं। उनकी रचनाए मुख्यतः हिन्दीउर्दू तथा पंजाबी में हैं, परन्तु ब्रज भाषाखङी बोली , मारवाड़ी और हरियाणवी में भी इन्होने रचनाये की । गुलजार को वर्ष २००२ मे सहित्य अकादमी पुरस्कार और वर्ष २००४ मे भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष २००९ मे डैनी बॉयलनिर्देशित फिल्म स्लम्डाग मिलियनेयर मे उनके द्वारा लिखे गीत जय हो के लिये उन्हे सर्वश्रेष्ठ गीत का ऑस्कर पुरस्कार पुरस्कार मिल चुका है। इसी गीत के लिये उन्हे ग्रैमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। गुलज़ार का जन्म अविभाजित भारत के झेलम जिला पंजाब के दीना गाँव में, जो अब पाकिस्तान में है, १८ अगस्त १९३६ को हुआ था। गुलज़ार अपने पिता की दूसरी पत्नी की इकलौती संतान हैं। उनकी माँ उन्हें बचपन मे ही छोङ कर चल बसीं। माँ के आँचल की छाँव और पिता का दुलार भी नहीं मिला। वह नौ भाई-बहन में चौथे नंबर पर थे। बंट्वारे के बाद उनका परिवार अमृतसर (पंजाब , भारत) आकर बस गया, वहीं गुलज़ार साहब मुंबई चले गये। वर्ली के एक गेरेज में वे बतौर मेकेनिक काम करने लगे और खाली समय में कवितायें लिखने लगे। फ़िल्म इंडस्ट्री में उन्होंने बिमल राय, हृषिकेश मुख़र्जी, और हेमंत कुमार के सहायक के तौर पर काम शुरू किया. बिमल राय की फ़िल्म बंदनी के लिए गुलज़ार ने अपना पहला गीत लिखा। गुलज़ार त्रिवेणी छ्न्द के सृजक हैं । 
                                              

प्रमुख किताबें       चौरस रात (लघु कथाएँ, 1962)     जानम (कविता संग्रह, 1963)    एक बूँद चाँद (कविताएँ, 1972)                                                 रावी पार (कथा संग्रह, 1997)      रात, चाँद और मैं (2002)    रात पश्मीने की      खराशें (2003)

बतौर निर्देशक 

फ़िल्म में गुलजार ने बतौर निर्देशक अपना सफर १९७१ में मेरे अपने से शुरू किया। १९७२ में आयी संजीव कुमार और जया भादुङी अभिनीत फिल्म कोशिश जो एक गूंगे बहरे दम्पति के जीवन पर आधारित कहानी थी, ने आलोचकों को भी हैरान कर दिया। इसके बाद गुलजार ने संजीव कुमार के साथ आंधी(१९७५), मौसम(1975), अंगूर(१९८१) और नमकीन(१९८२) जैसी फिल्मे निर्देशित की।

मेरे अपने (1971)    परिचय (1972)     कोशिश (1972)    अचानक (1973)    खुशबू (1974)   आँधी (1975)     मौसम (1976)       किनारा (1977)      किताब (1978)      अंगूर (1980)       मकीन (1981)     मीरा (1979)     इजाजत (1986)    लेकिन (1990)      लिबास (1993)       माचिस (1996)     हु तू तू (1999)

गीतकार के रूप मे      ओमकारा      रेनकोट    पिंजर      दिल से        आँधी       दूसरी सीता         इजाजत

अन्य फिल्म निर्माण भूमिका      आँधी (1975) - पटकथा, संवाद                   मीरा (1979) - पटकथा, संवाद

पुरस्कार और सम्मान

फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ गीतकार - १९७७, १९७९, १९८०, १९८३, १९८८, १९८८, १९९१, १९९८, २००२, २००५

पद्मभूषण -  गुलज़ार को भारत सरकार द्वारा सन २००४ में कला क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। 

Thursday, August 15, 2013

स्‍वतंत्रता संग्राम में महि‍लाओं की भूमि‍का - भाग 2

                        15 अगस्‍त पर सीजी रेडि‍यो की वि‍शेष प्रस्‍तुति



                                            
आलेख व स्‍वर - मीनू सिंह
प्रस्‍तुति‍ - संज्ञा टंडन

Wednesday, August 14, 2013

स्‍वतंत्रता संग्राम में महि‍लाओं की भूमि‍का - भाग 1

15 अगस्‍त पर सीजी रेडि‍यो की वि‍शेष प्रस्‍तुति-


                            



आलेख व स्‍वर - मीनू सिंह
प्रस्‍तुति‍ - संज्ञा टंडन  

Tuesday, August 6, 2013

हरेली की शुभकामनाएं


सीजी रेडि‍यो की तरफ से आप सभी को
 छत्‍तीसगढ़ के लोकपर्व हरेली की शुभकामनाएं



हरेली के अवसर पर ब्‍लॉगर ललि‍त शर्मा की एक पुरानी पोस्‍ट का श्‍वेता पांडे के स्‍वर में पाठन.....

हरेली अमावस और जादू-टोना की रात ---- ललित शर्मा




प्रस्‍तुति‍ - संज्ञा टंडन

Monday, August 5, 2013

बैरागी चित्तौड़ - तीसरी कड़ी

सीजी रेडियो पर सुनिए राजस्थान के प्रसिद्ध लेखक "तन सिंह जी" की रचना "बैरागी चित्तौड़"। इसका धारावाहिक प्रसारण किया जा रहा है, इसे स्वर दिया है संज्ञा टंडन जी ने। 





प्रस्तुतकर्ता - ललित शर्मा