Sunday, December 9, 2012

विशाल भारद्वाज का संगीतमय फि‍ल्‍मी सफर

विशाल भारद्वाज का संगीतमय फि‍ल्मी सफर...सुनील चि‍पड़े के साथ......

           
                             प्रस्तुति- सुनील चिपड़े                                  



 
"विशाल भारद्वाज" का जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले मे हुआ था। उनका बचपन मेरठ में गुजरा। उनके पिता राम भारद्वाज एक कवि थे और शौकिया तौर पर हिन्दी फिल्मो के लिये गाने लिखते थे। पिता यह चाहने पर उन्होने संगीत सीखा। दिल्ली आने पर एक दोस्त की वजह से उनकी संगीत में दिलचस्पी हुई। विशाल ने राज्य स्तरीय क्रिकेट मैच भी खेले हैं। शुरुआती दौर मे उन्होने पेन म्यूजिक रिकॉर्डिंग कंपनी मे भी काम किया। तभी दिल्ली में उनकी मुलाकात गुलजार साहब से हुई। गुलजार के साथ उन्होने ‘चड्डी पहन के फूल खिला है’ गीत की रिकॉर्डिंग की। उसके बाद से उन्हे माचिस के लिए संगीत बनाने का मौका मिला।
संगीतकार
विशाल ने अपना सफर गुलजार के साथ मिलकर छोटे पर्दे पर द जंगल बुकएलिस इन वंडरलैंड और गुब्बारे के साथ शुरु किया। इसके बाद उन्होने गुलजारनिर्देशित फिल्ममाचिस का संगीत दिया। इस फ़िल्म के गीतों ने अपार लोकप्रियता हासिल की, और विशाल भारद्वाज रातों रात सुर्खियों में आ गए। इस फिल्म के लिये उन्हे वर्ष १९९६ के फिल्मफेयर आर. डी. बर्मन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। १९९९ मे आयी फिल्म गॉडमदर के लिये उन्हे श्रेष्ठ संगीत का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार भी मिला। वर्ष २०११ मे एक बार फिर फिल्म इश्किया के लिये उन्हे यह पुरस्कार दिया गया। इश्किया का निर्माण भारद्वाज ने किया है। इसी फिल्म के लिये उनकी पत्नी रेखा भारद्वाज को भी राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। विशाल ने कई सारी हिन्दी फिल्मों के लिये संगीत दिया है जिसमे सत्याचाची ४२०मकबूलओंकाराइश्किया और सात खून माफ प्रमुख हैं।
 
फिल्म निर्देशक
विशाल निर्देशित पहली फिल्म मकङी थी। इसके बाद उन्होने शेक्सपियर के नाटक मैकबेथ पर आधारित  फिल्म मकबूल बनाई। मक़बूल को बर्लिन फ़िल्म समारोह सहित कई अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोहों में जगह मिली। वर्ष २००६ मे उन्होने शेक्सपियर द्वारा रचित नाटक ओथेलो पर आधारित फिल्म ओंकारा निर्देशित की। विशाल भारद्वाज ने इस फिल्म के निर्देशन और पटकथा लेखन के साथ-साथ फ़िल्म के संवाद भी लिखे। मक़बूल के बाद एक बार शेक्सपियर की रचनाओं पर फिल्म बनाकर भारद्वाज ने अपनी निर्देशन क्षमता का लोहा मनवाया। इस फिल्म की सफलता ने उन्हे नई पीढ़ी के ऊर्जावान, उत्साही और कल्पनाशील निर्देशको की पंक्ति ला खङा किया। 30वें ‘कायरो फिल्म समारोह’ में फिल्म ओंकारा के लिए उन्हे सर्वश्रेष्ठ निर्देशक घोषित किया गया। ओंकारा के लिए विशाल को राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार समिति का विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके बाद उन्होने रस्किन बॉन्ड के उपन्यास पर आधारित बच्चों के लिये फिल्म द ब्लू अम्ब्रेला का निर्देशन किया। २००९ मे उनकी फिल्म कमीने प्रदर्शित हुई। इस फिल्म को दर्शकों से लेकर आलोचक तक सबकी प्रशंसा मिली। कमीने के लिए विशाल को पहले ग्लोबल इंडियन म्यूज़िक अवॉर्ड्स मे सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वर्ष २०१० मे आयी अभिषेक चौबे निर्देशित फिल्म इश्किया जिसका निर्माण, संवाद, संगीत और पटकथा लेखन विशाल ने किया था, के लिये विशाल को विशाल सर्वश्रेष्ठ संगीतकार और उनकी पत्नी रेखा भारद्वाज को सर्वश्रेष्ठ गायिका का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार मिला। २०११ मे उन्होने रस्किन बांड की सुज्ज़न'स सेवन हस्बेंड्स पर आधारित फिल्म ७ खून माफ निर्देशित की। इस फिल्म को दर्शकों और आलोचकों की मिली जुली प्रतिक्रिया मिली।
फिल्मोग्राफी
वर्षफ़िल्मयोगदानटिप्पणी
2012डेढ इश्कियानिर्माता, पटकथा लेखक, संगीतकारघोषित
2012मटरू की बिजली का मंडोलानिर्माता, निर्देशक, संगीतकारघोषित
2011७ खून माफनिर्माता, निर्देशक, पटकथा लेखक, संगीतकार

2010इश्कियानिर्माता, पटकथा लेखक, संगीतकारसर्वश्रेष्ठ संगीत का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार
2009कमीनेनिर्देशक, पटकथा लेखक, संगीतकार

2008हाल-ए-दिलसंगीतकार

2012यू मी और हमसंगीतकार

2007नो स्मोकिंगनिर्माता, संगीतकार

2007निशब्दसंगीतकार

2007दस कहानियांसंवाद लेखक

2006ओमकारानिर्देशक, संगीतकार, संवाद लेखकराष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार समिति का विशेष पुरस्कार, कायरो फिल्म समारोह में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार


4 comments:

संध्या शर्मा said...

बहुत अच्छा लगा आज की पोस्ट सुनकर... आपने हमसे पूछा था न कि हम क्या सुनना चाहते हैं, यहाँ. तो संज्ञा जी हम अपनी कोई पोस्ट सुनना चाहते हैं, यहाँ और आप अपनी हर पोस्ट में वो सब लाते जा रहे हैं, जो हमें पसंद है... शुभकामनायें

Ratan singh shekhawat said...

बहुत अच्छा लगा सुनकर

SUNIL CHIPDE ,BILASPUR said...

post par sunane ke baad laga ..... meri prastuti me bahot kuchh sudhaarki gunjaish hai. log sune to aur kahenge INFOTENMENT Kki tarah ham pahuche ki nahi????

log kuchh kahe to kami ko dusaro ke angel se bhi samajh paunga

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

उम्दा प्रस्तुतीकरण

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